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जीवन साधना से लाभ।


 साधना जीवन की अनिवार्यता है। बिना साधना के कुछ भी प्राप्त नहीं होता। जीवन में। श्रेष्ठतम की उपलब्धि साधना के बिना संभव नहीं है। जीवन में सुख भोग के साधन भी बिना साधना के प्राप्त नहीं होते। मानवेतर जीवन के लिए धर्म और आध्यात्मिक साधना सर्वाधिक आवश्यकता होती है । सभी साधना धर्म एवं अध्यात्म की साधना ही उच्च जीवन देने वाली है। आध्यात्मिक साधना का आरंभ धर्म साधना से होता है। धर्म! की साधना से। शारीरिक! को मानसिक स्वास्थ्य ही प्राप्त होता है। इससे मन का संतुलन बना रहता है। सांसारिक संबंधों में सुधार होता है। प्रेम भावना व सेवा भावना में वृद्धि होती है। दया भावना का विकास होता है। शिष्टाचार! विनम्रता का विकास होता है। कष्ट सहन करने की क्षमता आती है आदि अनेक गुणों का विकास होता है जिससे मनुष्य शांति पूर्वक जीवन यापन करता है। धर्म की यह साधन ही मनुष्य की आध्यात्मिक उन्नति की पृष्ठभूमि तैयार करती है जिससे मनुष्य की चेतना शक्ति का विकास होता है जो अंत में मोक्ष प्राप्त का साधन बनती है। मनुष्य को जब अपनी चेतना शक्ति का अनुभव होता है तो उसकी आध्यात्मिक शक्तियां का जागरण होता है। इसी के जागरण से उसको ईश्वर अनुभूति होती है तथा सृष्टि को जान लेता है।

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