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संदेश

health is wealth

To maintain health, wealth, regular health workouts, pranayama, posture, running, doing what you love to do regularly, I have found at my age 45 that health brings joy and happiness in life, mental satisfaction and stability in work and gives us our Exercise regularly to maintain health or exercise as you like, but you should do 50% diet daily for good health. 25% rest especially good Halth is necessary I have maintained my health the same routine and do all I say health is wealth.

स्वास्थ ही संपत्ति है

स्वास्थ ही संपत्ति इससे बनाए रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य वर्कआउट प्राणायाम आसन दौड़ना यह जो आपको खेल पसंद उसे नियमित रूप से करना मैंने अपनी उम्र 45 में पाया है    कि स्वास्थ्य जीवन में आनंद और खुशी मानसिक संतोष और काम में स्थिरता प्रदान करता है तथा हमें अपने स्वास्थ को बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या कसरत या आपको जो पसंद हो पर प्रतिदिन आपको करना हैअच्छा स्वास्थ्य के लिए५०%डाईट २५%वर्कआउट२५%आराम विशेष अच्छी हालथ  के लिए जरूरी है मैंने इसी दिनचर्या से अपना स्वास्थ्य को मेंटेन रखा है और सभी से मैं तो कहता हूं स्वास्थ्य ही संपत्ति है

मन को भटकने से कैसे रोके

शरीर आत्मा का वाहन मात्र है इससे निरोग और प्रसन्न रखने के लिए जितनी अनिवार आवश्यकताये है उतने में ही संतुष्ट हो जाए भौतिक संप्रदाय बढ़ाने की अपेक्षा आत्मिक सद्गुणों की संप्रदाय बढ़ाना उचित बुद्धिमत्ता पूर्व है प्रलोभनों में मन को बहुत आकर्षण रहा तो सारा मनोबल शरीर बल और समय उसी दिशा में लगा रहेगा और आत्मिक प्रगति के तीनों ही साधन बहुत कम मात्रा में बचेंगे फलस्वरुप सफलता भी थोड़ी सी ही मिलेगी शारीरिक रक्षा और पारिवारिक व्यवस्था के लिए उचित मनोयोग लगाना व्यवस्थित करना इन करतूतों को अपेक्षा करने के लिए कोई नहीं कहता अलौकिक कर्तव्यों का उचित सीमा में पालन करना साधना का ही एक भाग है शरीर और परिवार भी हमारे उनके संबंधी उनकी अपेक्षा क्योंकि जाए ऐसी उपेक्षा से जीवन स्वभाविक और समान क्रम अस्वस्थ होते हैं शील मानव के लिए उचित नहीं कहा जा सकता हमें अपने शारीरिक मानसिक पारिवारिक समाजिक सभी कर्तव्यों को उचित रीति से पूर्ण करने चाहिए पर इसमें इतना अधिक लोभ और मोह ना हो आत्मिक कर्तव्यों कीओर उपेक्षा की जाने लगे और अनिछा उत्पन्न हो जाए।

बुद्धिमान व्यक्ति कैसे होते हैं

यह बुद्धि आत्म निरीक्षण   और आत्मचिंतन क्षमता से निपटने के लिए हैं वह लोग जो इस बुद्धि में मजबूत है वह आमतौर पर अंतर्मुखी होते हैं और अक्सर अकेले ही काम करना पसंद करते हैं वह लोग अपने प्रति सजग  रहते हैं और अपनी भावना उद्देश्यों और प्रेरणाओं को समझने योग होते हैं उनमें अक्सर विचारों पर आधारित काम करने की इच्छा होती है जैसे कि दर्शनशास्त्र वह तब अच्छे से सीखते हैं जब उन्हें विषय पर स्वयं ही ध्यान लगाने के लिए मुक्त कर दिया जाए इस प्रकार की बुद्धि के साथ अक्सर उच ईसतर की सिधांत जुडी रहती है।

महान व्यक्ति कैसे होते हैं

 महान व्यक्ति वही माना जाता है जिसने मानव जाति के लिए कुछ किया हो जिसने दुनिया के दुखों में कुछ कमी की हो जिसने अपने बल का प्रयोग अबलाओंऔरअनाथो  को ऊपर उठाने के लिए किया हो जिसने कई रोगियों द्वारा मानव जाति को रोग से मुक्त करने के लिए कुछ सहायता की हो जिसने सभी को अपने समान मानकर उनकी सुख सुविधाएं के लिए कुछ किया हो मन की शक्ति सचमुच अजय है आदि काल से आज तक कभी महापुरुषों ने मन कीइस शक्ति का गुणगान किया है संसार को ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता है|

मन की सोच उची रखो

यदि आप अपना कल्याण चाहते हैं तो अपना रूठा मन को मनाइए यदि 1,10,20 में ना माने तो हजार बार मनाइए जिस दिन आपका मन मानकर पुन: ठीक रहा पर आ गया उसी दिन से आपके जीवन में उन्नति के सारे मार्ग खुल जाएंगे आज जो निष्कर्ष एवं निमनकोटी की परिस्थितियां घिरे हुए हैं कल्याणकारी अवस्थाओं में बदल जाएगी मन के सामने जीवन के आसान चित्र के कल्याणकारी संकेतों से परिपूर्ण प्रमाण और परोपकार के विचारों में मन को मनाने की सबसे अधिक क्षमता है जो कुछ सोचिए उचॉ सोचिए जो कुछ चिंतन कल्याणकारी जो भी कल्पना मनोरंजन एवं पवित्र विचारों से ही संस्कार पड़ते हैं।

हमारा भोजन कैसा हो

भोजन का एकमात्र उद्देश्य भुख मिटाना ही नहीं है उसका मुख्य उद्देशआरोग एवं स्वास्थ्य ही हैं जिस भोजन में भूख को तो मिटा दिया किंतु स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाला वह भोजन उपयुक्त भोजन नहीं माना जाएगा उपयुक्त भोजन वही है जिससे स्वास्थ्य की वृद्धि हो विटामिनों की दृष्टि हरे शाक तथा फल आदी ही स्वास्थ्य  के लिए आवश्यक है इसके अतिरिक्त नमक आवश्यक तत्व भी फलो तथा शाको मे पाया जाता है अनाज के छिलकों में भी यह तत्व वर्तमान रहता है किंतु अझानवश मनुष्य अनाजों को पीसकर यह तत्व नष्ट कर देते हैं कहना न होगा कि प्रकृति किस रूप में फलों और अनाजों को पैदा और पकाया करती है उसी रूप में ही वे मनुष्य के वास्तविक आहार है।

अपने झान को कमाई मे बदलो

अपनी रुचि के अनुसार अपने कामो को ठीक से सीखो और विवेक से उस काम को करके आप अपनी सफलता के मुकाम तक पहुंचे रूपेश को मोबाईल सुधारने की बचपन से रूची थी और वह काम को करके आज कई लोगों के मोबाइल सुधार कर पैसे कमाता है इससे प्रेरणा मिलती है कि आप अपने काम को रुचि अनुसार चुने और उसे पूरा करें चाहे जो भी आपकी रुचियां हो दुनिया में सभी लोग 3 कामों से पैसा बनाते हैं किसी वस्तु को बेचने तथा किसी विचारों को बेचना तथा किसी की सेवा करके ये विचार हैं जो आपको उन्नति के रास्ते में सफलता तक पहुंचा सकते हैं मैं कोशिश करता हूं कम बताऊं और अच्छा लिखुं।

आपके पास देने के लिऍ बहुत कुछ है

आपके पास देने के लिए बहुत कुछ है चाहे आप 65 साल के हो या 95 साल के आपको वह अहसास होना चाहिए कि आपके पास देने के लिए बहुत कुछ है आप युवा पीढ़ी को स्थिर करने सलाह देने और निर्देशित करने में मदद कर सकते हैं आप अपने ज्ञान अनुभव और बुद्धिमानी का लाभ दे सकते हैं आप हमेशा आगे देख सकते हैं क्योंकि आप असीम जीवन में देख रहे हैं आप पाएंगे कि जीवन चमत्कारों और आश्चर्य से भरा है दिन के हर पल कुछ नया सीखने की कोशिश करें ऐसा करने पर  पाएंगे कि आपका मस्तिष्क  हमेशा युवा बना रहेगा|

महान बनने के लिये

 महान आदमी बनने के लिए बलिदान करना लगातार मेहनत करना प्रतिदिन अभ्यास करना उस वर्क के प्रति प्रेम करना अनुभवी व्यक्ति से ज्ञान लेना कठोर परिश्रम करना आत्मसमर्पण छोटी-छोटी बातों को दिल पर ना लगाना हर चीज में अपने निश्चित लक्ष्य  लिए बातों को ढूंढना संयम रखना |  

आहार चिकित्सा

संसार में दिखलाये देने वाले शारीरिक  एवं मानसिक दोषों में अधिकांश का कारण आहार संबंधी ज्ञान एवं असयम मे ही है जो भोजन शरीर को शक्ति और मन को बुद्धि प्रदान करता है वही  अनुपयुक्त होने पर उन्हें रोगी एवं निस्तेज भी बना देता है शारीरिक अथवा मानसिक विकृतियों को भोजन विशेषक भुलो का ही परिणाम मानना चाहिए अन दोस संसार के समस्त दोषों की जड़ है जैसे भोजन खाएं अन वेसा बने मन वाली कहावत से यही प्रतीत होता है कि मनुष्य की अच्छी बुरी प्रवृत्तियां आहार पर निर्भर है मनुष्य किस प्रकार काभोजन  करता है उसी प्रकार उसके गुण एवं स्वाद का निर्माण होता हें|

narmad darsan

Like every year today, all the devotees of Narmada ji worship them and all the countrymen come here to fulfill their wishes and the saints fulfill their wishes by doing meditation meditations and religious rituals for their spiritual attainment and All the people who come here take their blessings from Maa Narmada and they always come here every year and fulfill their wishes here. People over fie do here wishes come true and devotion to Veapani do wish fulfillment here |

अमीर बनना आपका हक़ हें|

यह दावा करने का साहस जुटाय कि आपको अमीर बनने का हक हे|आपका अचेतन मन आपके दावे को हकीकत में बदल देगा, अवचेतन मन के नियम जानने के बाद आपको हमेशा धन मिलता रहेगा चाहे यह किसी भी रूप में मिले धन को भगवान ना बनाय| यह सिर्फ एक प्रतीक है| याद रखें सची दौलत आपके दिमाग में हैं| आप संतुलन जीवन जीने के लिए आए हैं| इसमें आपकी जरूरत का सारा धन हासिल करना शामिल है|धन  को अपना एक मात्र लक्ष्य न  बनाएं| दौलत, खुशी, शांति, सच्ची अभिव्यक्ति और प्रेम का दावा करें| सब के प्रति प्रेम और सद्भाव रखें| फिर आपका चेतन मन इन सभी क्षेत्रों में आपको चक्रवर्ती ब्याज देगा| बार बार दोहराएं, 'में धन को पसंद करता हूं; मैं इसका उपयोग समझदारी से,सृजनात्मक तरीके से और तरीके से करूंगा| मैं इसे खुशी के साथ मुक्त करता हूं और यह हजार गुना होकर मेरे पास लौटता है| बिना कुछ दिए कुछ पाने की कोशिश छोड़ दें|मुफ्त लंच  जैसी कोई चीज नहीं होती है| आपको कुछ पाने के लिए कुछ देना होगा| अगर आप अपने लक्ष्य आदर्शों और कामो  को मानसिक ध्यान देंगे, तो आपका अचेतन मन हमेशा आपका साथ देगा, दौलत की कुंजी अचेतन मन के नियमों को ...

परमात्मा की प्राप्ति केसे होती हें|

मनुष्य मात्र को परमात्मा प्राप्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है| मनुष्य जिस  वर्ण,आश्राम, धर्म,साप्रदाय, वेशभूषा देश, आदि में है,वही रहते हुए वह अपना कल्याण कर सकता है, मनुष्य प्रत्येक परिस्थितियों में परमात्मा को प्राप्त कर सकता है, इसके लिए उसे परिस्थिति बदलने की जरूरत नहीं है, सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति तो कर्म करने से होती है, पर परमात्मा की प्राप्ति कुछ भी ना करने से होती है ,परमात्मा की प्राप्ति जड़ता {शरीर, इंद्रियां, मन, बुद्धि} के द्वारा नहीं होती, प्रत्युत जड़ता के त्याग से होती है|

सरस्वती महोत्सव बसंत पंचमी

अब मैं वेदमाता, ब्रह्मसुता, सब्दमुला,वाणी, देवी , महामाया श्रीसरस्वती जी  की वंदना करता जो मुख से शब्द निकल जाते है |अपार वाणी कहलाती है,और जो निषाद के मन का भाव सहित करती है, जो योगियो की समाधि,स्थित सुविद्या होने के कारण अविद्या को नष्ट करती है| जो महापुरुषों की व्यवस्था चतुर्थ वस्था में पर निकट रहने वाली माया और जिनके लिए साधु लोग बड़े-बड़े कार्यों में प्रवृत्त होते हैं जो महान लोगों की शांति ईश्वर की भक्ति गानों की विरक्ति और निरासो भी शोभा है जो अनंत ब्राह्मणों की रचना करती हे और विनोद में ही करती है और जो आधी पुरुषों की आड़ में खड़ी रहती है जो केवल देखने से ही दिखाई पड़ती है और विचार करने से अदरक हो जाती है और ब्रह्मा आदि भी जिसका पार नहीं पाते जो जगत के सभी नाटकों को भी तरीका है जो निर्मल स्तुति है और जिनके आनंद नंद तथा ज्ञान प्राप्त होती है मां सरस्वती को बार बार प्रणाम हे |

प्राकतिक बुध्दी क्या हें

प्राकृतिक संसार का ज्ञान  शामिल होता है प्राकृतिक बुद्धि में पौधे और जानवरों के उनके गुणों को जानना और उन्हें श्रेणीभद करना आमतौर पर वातावरण और आसपास का गहन अवलोकन तथा अन्य भाषाओं का वर्गीकरण करने की योग्यता होना होता है इसे प्राकृतिक की खोजबीन कर के पदार्थों का संग्रह करने से उनका अध्ययन करने से तथा उनका समूह बनाना, संवेदन कला, दृष्टि, आवाज,सुगना, स्वाद, और छुना, प्राकृतिक बदलावों का गहन अवलोकन आपसी संबंध और प्रारूप बनाता है|

जीवन का उदेश्य क्या हें

आपका उद्देश्य वही है, जो आप मानते हैं| आपका उद्देश्य वही ही है, जो आप खुद को देते हैं, आपका जीवन वैसा ही होगा, जैसा आप इसे बनाएंगे और कोई भी इसका मूल्यांकन करने के लिए कभी खड़ा नहीं होगा| यह सबक समझने में मुझे कई साल लग गय, क्योंकि मैं बहुत हद तक इन विचारों के साथ बड़ा हुवा था की मुझे कोई काम करना चाहिए और उसे नहीं कर पा रहा हु तो ईश्वर मुझसे खुश नहीं होगे जो मैं सचमुच समझ गया कि मेरा पहला  काम खुशी महसूस करना हें तो फिर में वही  काम करने लगा जिसमे मुझे  खुशी मिलती थी|यह मेरा प्रिय  बात हें, अगर इसमें मजा नहीं आता हें तो इसे मत करो खुशी, प्रेम,आनंद ,हँसी, यही तो असली बात हें अगर आपको एक धंटे तक बैठकर साधना करने में आनद मिलता हे तो वेसा ही करे |

अभ्यास से कुछ भी पाया जा सकता है

अभ्यास से विद्या को प्राप्त किया जा सकता है उत्तम गुण और स्वभाव से कुल  का गौरव बढ़ता है श्रेष्ठ पुरुष की पहचान अच्छे गुणों से होती है और आंखें देखकर क्रोध का ज्ञान होता है/

काली पूजा हर अमावस्या होती हे

काल शिव को कहा जाता हे और उनकी अर्दगनी होने के कारण ही काली को काली कहा जाता हे!यह तेज,पराक्रम,विजय,वैभव की अधिस्तात्री देवी हे दस महाविद्याओ में प्रमुक इस्तान काली जी का हे,दार्शनिक दरस्ती से काल तत्व की प्र्मुकता होने के कारण काली जी का प्रमुख इस्तान माना जाता हे,लेकिन काली जी का सर्वादिक प्रचलित रूप दक्चिना काली का हे,इसी रूप में काली जी की साधना की जाती हे काली जी को कालिका सियामा और रक्ता भी कहा जाता हे,तंत्र शादना में काली जी का प्रमुक इस्तान हे इन्ही की पूजा की जाती हे!

वह ब्रम्हा पूण हें?

वह ब्रह्म पूण हें,यह जगत भी पूण हें;पूण ब्रम्हा से ही यह पूण जगत उदित होता हे;पूण से ही पुनता लेकर जब यह जगत बन चुकता हे,तब भी वह ब्रम्हा पूण-का-पूण बचा रहता हें/वह परमात्मा कपन तक नहीं करता परन्तु मन से भी अदिक वेगवान हे;इंद्रिया उसे प्राप्त नहीं कर सकती परन्तु वह इन्द्रियों से भी वर्तमान हे;वह ठहरा हुवा ही अन दोड़ते हुवो को पीछे छोड़ देता हे;उसी के कारण वायु,जो हलकी हे,अपने से भारी जल को उठा लेती हें,इसलिए वह पूण हे ?