करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात के, सिल पर परत निशान।।
अभ्यास के बल पर मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, अज्ञानी भी ज्ञानी हो जाता है। इतिहास साक्षी है कि अभ्यास एवं परिश्रम के बल पर असंभव दिखाई देने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। ऋषि-मुनियों की सिद्धियां, वैज्ञानिकों के आविष्कार, राजाओं की विजय गाथाएं- सब इसी का प्रमाण हैं कि यदि मनुष्य हिम्मत न हारे और निरंतर अभ्यास और प्रयास करता रहे तो फिर 'असंभव' शब्द के लिए कहीं स्थान नहीं। बार-बार एक ही काम को कर उसमें निपुण होने का प्रयास ही अभ्यास है।
अभ्यास एक ऐसा माध्यम है जिससे कठिन से कठिन कार्य में कुशलता पाई जा सकती है। जीवन में आप जो भी अच्छा जानते हैं और करना चाहते हैं, उसका अभ्यास करते रहिए। जीवन में अभ्यास की लगातार जरूरत पड़ती रहती है।
आप यदि शुरुआत में प्रतिदिन मन मारकर रोज 6 बजे उठते हैं तो कुछ दिनों बाद 6 बजे उठने का आपको अभ्यास हो जाता है। बाद में यदि आप न भी उठेंगे तो आपकी नींद ठीक 6 बजे ही खुल जाएगी। इसी तरह जन्म और मृत्यु आपके अभ्यास का ही परिणाम है। जिंदगीभर आप किस तरह जिए? अनुशासन में जिये या कि अराजक तरीके से? आपके इस तरीके के अभ्यास से ही आपकी मृत्यु होगी अर्थात अंत में परिणाम निकलेगा। अच्छे अंत से अच्छी शुरुआत भी होती है और अच्छी शुरुआत से अच्छा अंत।
जन्म और मृत्यु के रहस्य को समझना है, तो आप वर्तमान में जी रहे जीवन को समझें। आपकी आदतें, कर्म, अभ्यास, विचार आदि सभी चित्त में इकट्ठे हो रहे हैं। सभी के सम्मिलित प्रभाव से ही परिणाम निकलेगा। आपकी नींद खुलने का जब समय होता है, अधिकतर मौके पर तब ही आपके जन्म लेने का समय होगा इसलिए अभ्यास के महत्व को समझें। पुराने लोग अपनी दिनचर्या को सुधारते थे और उसी के अनुसार जीवन-यापन करते थे।
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